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Heart Touching Hindi Poems

Heart Touching Hindi Poems– दोस्तों कवितायेँ तो बनी ही दिल को छूने के लिए हैं और आज तो हम आपके लिए कुछ ज़िन्दगी पर, प्यार पर कुछ रोमांटिक और गहरी जो आपके दिल को छू जाएँगी ऐसी कवितायेँ लाये हैं। इनमें हम आपके लिए कुछ short हिंदी कवितायेँ भी लाये हैं जो सिर्फ दिल तक नहीं आपकी रूह तक उतर जाएँगी और आप उन्हें शेयर किये बिना रह नहीं पाएंगे दोस्तों अगर आपको हमारी आज की कवितायेँ पसंद आएं तो कमेंट करके जरूर बताइयेगा। तो चलिए आज की महफ़िल शुरू करते हैं

1. Heart Touching Hindi Poems-हर बात पे अगर वो बैठेंगे मुंह फुला कर

हर बात पे अगर वो बैठेंगे मुंह फुला कर
रूठे हुओं को कब तक लाएंगे हम मना कर

सच बोलकर सदा यूँ दिल खुश हुआ हमारा
जैसे कोई बच्चा हँसता हो खिलखिलाकर

काफूर हो गए जो मिलने पे थे इरादे
देखा किये हम उनको बस पास में बिठा कर

अपने रकीब को जब देखा वहां तो जाना
रुसवा किया गया है हमको तो घर बुला कर

पहले दिए हजारों जिसने थे घाव गहरे
मरहम लगा रहा है अब वो नमक मिला कर

गहरी उदासियों में आयी यूँ याद तेरी
जैसे कोई सितारा टूटा हो झिलमिलाकर

हमको यकीं है उसने आना नहीं है फिर भी
बैठे हुए हैं पलकों को राह में बिछा कर

गर खोट मन में तेरे बिलकुल नहीं है
फिर किस वजह से करता है बात फुसफुसाकर

नीरज गोस्वामी

यह कविता आपकी रूह को छू जाएँगी जरूर पढ़िए: [Hindi Love Poems for Her]-[Amazing 2020 Collection Ever.]

2. Heart Touching Hindi Poems- ये कैसे रहनुमा तुमने चुने हैं

ये कैसे रहनुमा तुमने चुने हैं
किसी के हाथ के जो झुनझुने हैं

तलाशो मत तपिश रिश्तों में यारो
शुक्र मानो अगर वो गुनगुने हैं

बहुत कांटे चुभेंगे याद रखना
अलग रास्ते अगर तुमने चुने हैं

‘दया’ ‘ममता’ ‘भलाई’ और ‘नेकी’
ये सारे शब्द किस्सों में सुने हैं

यहां जीने के दिन हैं चार केवल
मगर मरने के मौके सौ गुने हैं

परिंदे प्यार के उड़ने दे
हटा जो जाल नफरत के भुने
हैं

नीरज गोस्वामी

3. Heart Touching Hindi Poems-हम तो बस अटकलें लगाते हैं

हम तो बस अटकलें लगाते हैं
कब किसे यार जान पाते हैं

आप खुश हैं मेरे बगैर अगर
अश्क छुप-छुप के क्यों बहाते हैं

लाख इनका करो ख्याल मगर
कैद में पंछी फड़फड़ाते हैं

नाम माँ का जबान पे आता है
दर्द में जब भी बिलबिलाते हैं

ज़िन्दगी है गुलाब की डाली
साथ फूलों के खार आते हैं

चाँद आता नज़र अमावस में
आप जब गम में मुस्कुराते हैं

हुस्न निखरे कई गुना
फूल जब ओस में नहाते हैं

नीरज गोस्वामी

4. Heart Touching Hindi Poems-सांप को बदनाम यूँ ही कर रहा है आदमी

सांप को बदनाम यूँ ही कर रहा है आदमी
काटने से आदमी के मर रहा है आदमी

दुश्मनी की बात करता कौन सा मजहब बता
क़त्ल उसके नाम पे क्यों कर रहा है आदमी

कातिलों को दे चुनौती तो बचे शायद मियां
अब कहाँ महफूज़ अपने घर रहा है आदमी

प्यार की खुशबू से यारों जो महकता था चमन
अब धुआं नफरत का उसमें भर रहा है आदमी

मिट गया निशाँ उसका सदा के वास्ते
बिन उसूलों के कभी भी अगर रहा है आदमी

नीरज गोस्वामी

5. Heart Touching Hindi Poems-गीत बचपन के वो सुहाने से

गीत बचपन के वो सुहाने से
लौटते कब हैं फिर बुलाने से

बातें सच्ची कभी-कभी यारो
झूठ लगती हैं फुसफुसाने से

हौंसले कातिलों के बढ़ते हैं
बाँध के हाथ गिड़गिड़ाने से

रब कभी कुछ नहीं दिया करता
रात-दिन घंटियां बजाने से

याद एहसान कौन रखता है
फायदा भूल जा गिनाने से

मायने ही समझ न पाए जो
बात बचिए उसे सुनाने से

इश्क़ भी भोझ-सा लगे
हर घडी यार को मनाने से

नीरज गोस्वामी

6. Heart Touching Hindi Poems -मुस्कुराकर डालिये तो इक नजर बस प्यार से

मुस्कुराकर डालिये तो इक नजर बस प्यार से
नरम पड़ते देखिये दुश्मन सभी खूंखार-से

तौल बाजू, कूद जाओ इस चढ़े दरिया में तुम
क्यों खड़े हो यार तट पर ताकते लाचार-से

वक़्त मत जाया कभी करना पलटने में उसे
गर नहीं मिलता जो चाहा आपको सरकार से

नाम तो लेता नहीं मेरा, मगर लगता है ये
रात-भर आवाज देता है कोई उस पार से

फूल तितली रंग खुशबू जल हवा धरती गगन
सब दिया रब ने नहीं पर हम झुके आभार से

जब तलक है पास कीमत का पता चलता नहीं
आप उनसे पूछिए जो दूर हैं परिवार से

जिंदगी में यूँ सभी से ही मिली खुशियां, मगर
जो बिताये साथ तेरे दिन थे वो त्यौहार से

झूठ कहने का हुनर अगर सीखा नहीं
आप सहरा में नजर आओगे फिर गुलजार से

नीरज गोस्वामी

7. Heart Touching Hindi Poems -जख्म सबसे छुपाइये साहब

जख्म सबसे छुपाइये साहब
भीड़ में मुस्कुराइए साहब

ख़ाक मत डालिये शराफत पर
आप इज़्ज़त कमाइए साहब

भूख से बिलबिलाते लोगों को
कायदे मत सिखाइये साहब

खार पर तितलियाँ नहीं आती
फूल-सा मुस्कुराइए साहब

दीजिये खाद जब तलक फल दे
वरना आरी चलाइये साहब

तेज तपती हुई दोपहरी में
गीत बारिश के गाइये साहब

दर्द की इन्तेहाँ परखने को
चोट अपनों से खाइये साहब

नीरज गोस्वामी

8. Heart Touching Hindi Poems -ज़िन्दगी की राह में हो जाएँगी आसानियाँ

ज़िन्दगी की राह में हो जाएँगी आसानियाँ
मुस्कुराएं याद कर बचपन की वो शैतानियां

होशियारी भी जरूरी मानते हैं हम, मगर
लुत्फ़ आता ज़िन्दगी में जब करें नादानियाँ

देख हालत देश की रोकर शहीदों ने कहा
क्या यही दिन देखने को हमने दी कुर्बानियां

तेरी यादें तितलियाँ बनकर हैं हरदम नाचतीं
चैन लेने ही नहीं देती कभी मार्जनीयां

तब रहा करता था बरसों याद सबको हादसा
अब नहीं होती किसी को जानकार हैरानियाँ

जी-हुजूरी जब तलक है तब तलाक वो आपका
फेर लेता है नजर जब भी हों न-फ़रमानियाँ

बरकतें खुलकर बरसती उनपे हैं सदा
मानते हैं बेटियों को जो घरों की रानियां

नीरज गोस्वामी

9. Heart Touching Hindi Poems-यूँ हसरतों का दायरा हद से बढ़ा लिया

यूँ हसरतों का दायरा हद से बढ़ा लिया
खुशियों को ज़िन्दगी से ही अपनी घटा लिया

खुद पर भरोसा था तभी, उसने ये देखिये
दीपक हवा के ठीक मुकाफ़िल जला लिया

मेहनतकशों को नींद कहीं पे जो आ गयी
बिस्तर जमीं को, बाहों को तकिया बना लिया

शिद्दत से है तलाश मुझे ऐसे शख्स की
इस दौर में है जिसने भी ईमान बचा लिया

वो ज़िन्दगी भी ज़िन्दगी क्या बोलिये मियां
औरों से ज़िन्दगी में जो तुमने सदा लिया

माँ-बाप को न पूछा कभी जीते-जी, मगर
दीवार पे उन्ही का है फोटो सजा लिया

उसी के नाम से काटो ये ज़िन्दगी
इक बार जिसको आपने दिल में बसा लिया

नीरज गोस्वामी

10. Heart Touching Hindi Poems-क्यों, कैसे ये मत सोचो होता है जो होने दो

क्यों, कैसे ये मत सोचो
होता है जो होने दो

चैन चलो पाया कुछ तो
जब भी पूजा पत्थर को

प्यार मिलेगा बदले में
पहले प्यार किसी को दो

किसको देता है सब-कुछ
नीली छतरी वाला वो

जो देखा, सच बोल दिया
तुम क्या नन्हे-मुन्ने हो

कांटो वाली राहों में
फूलों-वाले पौधे बो

याद में उसकी ऐ
रोना है तो खुलकर रो

नीरज गोस्वामी

11. Short Love Poems for Her in Hindi- चाह तुझको नहीं है पाने की

चाह तुझको नहीं है पाने की
खासियत ये तेरे दीवाने की

गैर का साथ गैर के किस्से
ये तो हद हो गयी सताने की

साथ फूलों के वो रहा जिसने
ठान ली खार से निभाने की

टूट बिखरेगा दिल का हर रिश्ता
छोड़िये जिद ये आजमाने की

सारी खुशियों को लील जाती है
होड़ सबसे अधिक कमाने की

नाचिये, थाप जब उठे दिल से
फिक्र मत कीजिये जमाने की

साफ़ कह दीजिये नहीं आना
आड़ मत लीजिये बहाने की

फेंक दरवाजे तोड़ कर
देख फिर शान आशियाने की

नीरज गोस्वामी

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12. मेरे बचपन का वो साथी है अभी तक गाँव में

मेरे बचपन का वो साथी है अभी तक गाँव में
इक पुराना पेड़ बाकी है अभी तक गाँव में

जहर सी कड़वी बहोत हैं इस नगर में बोलियां
हर जबान पर गुड़ की भेली है अभी तक गाँव में

शहर में देखो जवानी में बुढ़ापा आ गया
पर बुढ़ापे में जवानी है अभी तक गाँव में

कोशिशें उसको उठाने की सभी जाय हुई
इक अजब-सी नातवानी है अभी तक गाँव में

सारे त्योहारों पे मिलकर मौज-मस्ती, नाचना
रोज पनघट पे ठिठौली है अभी तक गाँव में

पेट भरता था जिसे खाकर मगर ये मन नहीं
दूध-वाली वो जलेबी है अभी तक गाँव में

जिस्म की पुरपेच गलियों में कभी खोया नहीं
प्यार तो रूहानी है अभी तक गाँव में

नीरज गोस्वामी

13. दीप जलते रहें झिलमिलाते रहें

दीप जलते रहें झिलमिलाते रहें
तम सभी के दिलों से मिटाते
रहे

हर अमावस दिवाली लगे आप जब
पास बैठे रहें मुस्कुराते रहें

प्यार बासी हमारा न होगा अगर
हम बुलाते रहें वो लजाते रहें

बात सच्ची कही तो लगेगी बुरी
झूठ ये सोचकर क्यों सुनते रहें

दर्द में बिलबिलाना तो आसान है
लुत्फ़ है, दर्द में जब खिलखिलाते रहें

भूलने की सभी को है आदत यहां
कर भलाई उसे मत गिनाते रहें

सच कहूं तो सफल वो ग़ज़ल है जिसे
लोग गाते रहें, गुनगुनाते रहें

हैं पुराने भी बहोत कारगर
पर तरीके नए आजमाते रहें

नीरज गोस्वामी

14. रंजिशों को अलविदा की, यूँ करें तैयारियां

रंजिशों को अलविदा की, यूँ करें तैयारियां
दिल के गुलशन में उगाएं प्यार की फुलवारियां

जख्म जो देती हैं ये, ताउम्र वो भरते नहीं
खंजरों से तेज होती हैं, जबान की आरियां

छत, दरो-दीवार, खिड़की, या झरोखे से नहीं
घर बुलाता है अगर, गूंजे वहां किलकारियां

चंद लम्हों बाद थक कर सुख तो पीछे रह गया
पर चलीं बरसों हमारे साथ दुश्वारियां

जिंदगी आनंद से जीना है तो फिर छोड़ दें
झूठ, गुस्सा, लालच, वासना और मक्कारियां

आप तो सो जायेंगे महफूज़ बंगलौं में कहीं
शहर को सुलगाएँगी अलफ़ाज़ की चिंगारियां

काश, इस होली में मजहब का न कोई फर्क हो
रंग हों बस प्यार के, खुशियों की हों पिचकारियां

नीरज गोस्वामी

15. Heart Touching Hindi Poems -खौफ का जो कर रहा व्यापार है

खौफ का जो कर रहा व्यापार है
आदमी वो मानिये बीमार है

चार दिन की ज़िन्दगी में क्यों बता
तल्खियां हैं, दुश्मनी है, तकरार है

जिस्म से चलकर रुके जो जिस्म पर
उस सफर का नाम ही अब प्यार है

दुश्मनों से बच गए तो क्या हुआ
दोस्तों के हाथ में तलवार है

लुत्फ़ है जब राह अपनी हो अलग
लीक पर चलना कहाँ दुश्वार है

जिंदगी भरपूर जीने के लिए
गम, ख़ुशी में फर्क ही बेकार है

बोल कर सच फिर बना बुरा
क्या करे आदत से वो लाचार है

नीरज गोस्वामी

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16. Poetry in Hindi-उलझनें उलझनें उलझनें उलझनें

उलझनें उलझनें उलझनें उलझनें
कुछ वो चुनती हमें, कुछ को हम खुद चुनें

जो नचाती हमें थीं भुला सरे गम
याद करते ही तुझको बजी वो धुनें

पूछिए मत ख़ुशी आप उस पेड़ की
जिसकी शाखें परिंदों के गाने सुनें

वक़्त ने जो उधेड़े हसीं ख्वाब वो
आओ मिलकर दुबारा से फिर हम बुनें

सिर्फ पढ़ने से होगा क्या हासिल भला
जिंदगी में न जब तक पढ़े को गुनें

जो भी सच है कहा वो बिना खौफ के
तन रही हैं निगाहें तो बेशक तनें

नीरज गोस्वामी

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17. सबको अपना हाल सुनना, ठीक नहीं

सबको अपना हाल सुनना, ठीक नहीं
यूँ औरों के दर्द जगाना, ठीक नहीं

हम आँखों की भाषा भी पढ़ लेते हैं
हमको बच्चों सा फुसलाना, ठीक नहीं भाषा

ये चिंगारी दावानल बन सकती है
गर्म हवा में इसे उड़ाना, ठीक नहीं

बातों से जो मसले ठीक हो सकते हैं
उनके कारण बम बरसाना ठीक नहीं

जिद पर अड़ने वालों को छोडो यारों
दीवारों से सर टकराना ठीक नहीं

देने वाला घर बैठे भी देता है
दर-दर हाथों को फैलाना ठीक नहीं

सोते में ही ये मुफ़लिस मुस्काता है
इसको अभी जगाना ठीक नहीं

नीरज गोस्वामी

18. Short Hindi Poems- सल्तनत खुद को माने, समझदार है

सल्तनत खुद को माने, समझदार है
फैसले देख लगता है, बीमार है

वो किसी बात पर भी झगड़ते नहीं
जिनके दिल में खुदा के लिए प्यार है

इक खबर दब गयी सबको मालूम है
इश्तिहारों-भरा आज अखबार है

मत करें दोस्ती आप उस फूल से
जिसकी खिदमत में तैनात हर खार है

पेट की आग से जन्म लेता है जो
उसकी आँखों में देखो वो अंगार है

जिसकी फितरत में सच बोलना हो उसे
खौफ कोई दिखाना ही बेकार है

राह रही की आसान हो जाएगी
साथ चलने को जो तैयार है

नीरज गोस्वामी

जिसे सब ढूंढ़ते-फिरते हैं मंदिर और मस्जिद में
हवाओं में उसे मैं हरदम अपने साथ पाता हूँ

अदावत से न सुलझे हैं, न सुलझेंगे कभी मसले
हटा तू राह के कांटे, मैं लाकर गुल बिछाता हूँ

नहीं तहजीब ये सीखी की कह दूँ झूठ को भी सच
गलत जो बात लगती है गलत ही मैं बताता हूँ

मुझे मालूम है मैं फूल हूँ जहर जाऊंगा एक दिन
मगर ये हौसला मेरा है हरदम मुस्कुराता हूँ

हीं जब छाँव मिलती है कहीं भी राह में मुझको
सफर में अहमियत तब में शजर की जान जाता हूँ

उतरता हूँ मैं बीज बन धरती के सीने में
तभी तो फसल बनकर झूमता हूँ, लहलहाता हूँ

नीरज गोस्वामी

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19. Heart Touching Hindi Poems – बरसती घटा में नहा कर चलें

बरसती घटा में नहा कर चलें
कड़ी धुप में सर उठा कर चलें

सुकून से सफर ज़िन्दगी का कटे
अगर भोज सर का घटा कर चलें

जटिल है सयानों की दुनिया बहोत
सरल क्यों न इसको बनाकर चलें

दरारे हैं रिश्तों में सबको पाता
मजा है अगर ढँक-ढंका कर चलें

न ख़ारिज करें एक नादाँ को
नयी नस्ल को ये सीखा कर चलें

भले साथ अपने हो कोई नहीं
अकेले ही हम गुनगुनाकर चलें

है कठिन पर असंभव नहीं
सभी के दिलों में समाकर चलें

नीरज गोस्वामी

20. Deep Love Poems in Hindi-होगी तलाश-ए-इत्र ये मछली-बाजार में

होगी तलाश-ए-इत्र ये मछली-बाजार में
निकले तलाशने जो वफ़ा आप प्यार में

चल तो रहा है फिर भी मुझे ये गुमान हुआ
थम-सा गया है वक़्त तेरे इंतज़ार में

जब भी तुम्हारी याद ने हौले-से आ छुआ
कुछ राग छिड़ गए मेरे मन के सितार में

दुश्वारियां हयात की सब भूल-भाल कर
मुमकिन नहीं है डूबना तेरे खुमार में

ये तितलियों के रक्स, ये महकी हुई हवा
लगता है तुम भी साथ हो अबके बहार में

वो जानते हैं खेल में होता है लुत्फ़ क्या
जिनको न कोई फर्क हुआ जीत – हार में

अपनी तरफ से भी सदा पड़ताल कीजिये
यूँ ही यकीं करें न किसी इश्तिहार में

किसी के वास्ते खुद को निसार कर
खोया हुआ है किसलिए तू इफ्तिखार में

हयात- ज़िन्दगी
इफ्तिखार- सम्मान

नीरज गोस्वामी

अधूरी-अधूरी सी कविता मैं: Very Deep Romantic Poems in Hindi

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21. साल दर साल ये ही हाल रहा

साल दर साल ये ही हाल रहा
तुझसे मिलना बड़ा सवाल रहा

याद करना खुदा को भूल गए
नाम पर उसके बस वबाल रहा

पास था जो नहीं संभाला वो
जो न था उसका ही मलाल रहा

यूँ जहां से निकाल फेंका सच
जैसे सालन में कोई बाल रहा

क्या जरूरत इन्हे इबादत की
जिनके दिल में तेरा ख़याल रहा

ऐंठता भर के जेब में सिक्के
सोच में जो भी तंगहाल रहा

जान देता जो गैर की खातिर
इस जहां में वो लाजवळ रहा

फूल देखूं जिधर खिलें
ये तेरे साथ का कमाल रहा

नीरज गोस्वामी

22. आप आँखों में बस गए जब से

आप आँखों में बस गए जब से
नींद से दुश्मनी हुई तब से

आग पानी हवा जमीन फलक
और क्या चाहिए बता रब से

पहले लगता था वो भी औरों-सा
दिल मिला तो लगा जुदा सबसे

जो न समझे नजर की भाषा को
क्या कहा जाये फिर उसे लब से

हो गया इश्क़ आपसे जानम
जब कहा, पूछने लगे कब से

शाम होते ही जाम ढलने लगे
होश में भी मिला करो शब् से

शुभ मुहूर्त की राह मत देखो
मन में ठानी है तो करो अब से

तुम अकेले तो हो नहीं
जिंदगी किसकी कट सकी ढब से

नीरज गोस्वामी

23. Heart Touching Hindi Poems-साथ सच के ही जियेंगे जो कहा करते हैं

साथ सच के ही जियेंगे जो कहा करते हैं
वो सलीबों को उठाकर ही चला करते हैं

आ पलट देते हैं हम मिल के सियासत जिसमें
हुक्मरान अपनी रिआया से देगा करते हैं

धुप भी आये हवाओं को लिए साथ जहां
सब उसी घर की तमन्ना में जिया करते हैं

फूल हाथों में, तबस्सुम को खिला होंठों पर
तल्खियां सबसे छुपाया यूँ सदा करते हैं

दोष आंधी को भले तुमने दिए हैं लेकिन
जर्द पत्ते तो यूँ ही टूट गिरा करते हैं

इक गुजारिश है की तुम इनको संभाले रखना
दिल के रिश्ते हैं ये मुश्किल से बना करते हैं

चाह मंजिल की हमें क्यों हो, बताओ
हमसफ़र बांके मेरे जब वो चला करते हैं

नीरज गोस्वामी

24. Heart Touching Hindi Poems-तुझे दिल याद करता है तो नग्मे गुनगुनाता हूँ

तुझे दिल याद करता है तो नग्मे गुनगुनाता हूँ
जुदाई के पलों की मुश्किलों को यूँ घटाता हूँ

जिस शजर (पेड़) ने डालियों पर देखिये फल भर दिए
हर बशर (इंसान) ने आते – जाते उसको बस पत्थर दिए

रब की नजरों में सभी इक हैं तो उसने क्यों भला
एक को पत्थर दिए और एक को गौहर दिए

गुल हमेशा चाहता हमसे रहा बदले में वो
जिसने हमको हर कदम पर बेवजह नश्तर दिए

सोचिये तो खो रहे हैं क्यों अदावत ( दुश्मनी) में उन्हें
प्यार करने के खुदा ने जो हमें अवसर दिए

मिल गए हैं रहजनों ( लुटेरों ) के वास्ते
मुल्क को चुनकर ये कैसे आपने रहबर दिए

कुछ नहीं देती है ये दुनिये किसी को मुफ्त में
नींद ली बदले में जिसको रेशमी बिस्तर दिए

जिंदगी बक्शी खुदा ने माना के हमें
पर लगा हमको की जैसे खीर में कंकर दिए

नीरज गोस्वामी

25. गुफ्तगू भी कभी करा कीजे

गुफ्तगू भी कभी करा कीजे
दोस्त है दिल न यूँ डरा कीजे

बात दिल की कहो जमाने से
बेवजह घुट के मत मारा कीजे

जब सुकून-सा जरा लगे दिल में
तब दबी चोट को हरा कीजे

इक गुजारिश है याद जब आओ
आँख से मत मेरी झरा कीजे

इल्तिजा बस यही करू रब से
मैं हूँ खोटा मुझे खरा कीजे

थाम लेगा यकीं नहीं फिर भी
हाथ उसकी तरफ जरा कीजे

वो है खुशबू न बांधिए
उसको साँसों में बस भरा कीजे

नीरज गोस्वामी

26. Heart Touching Poems on Life in Hindi-तन्हाई की रातों में कभी याद न आओ

तन्हाई की रातों में कभी याद न आओ
हारूंगा मुझे मुझसे ही देखो न लड़ाओ

तुम राख करो नफ़रतें जो दिल में बसी हैं
इस आग से बस्ती के घरों को न जलाओ

बाजार के भावों पे नजर जिसकी टिकी है
चाँदी में नहाया न उसे ताज दिखाओ

किलकारियां दबती हैं कभी गौर से देखो
बस्तों से किताबों का जरा भोझ घटाओ

ये दौड़ है चूहों की यही इसका नियम है
आगे जो बढे सरे उसे मिल के गिराओ

बचपन की बहोत याद तुम्हें आएगी फिर से
चूल्हे की जरा आंच पे रोटी तो पकाओ

पुरपेच मुहब्बत की हैं गलियां बड़ी
मन में कोई डर है तो मत पाँव बढ़ाओ

नीरज गोस्वामी

दिल और आत्मा को छू जाने वाली जबरदस्त कवितायेँ एक बार जरूर पढ़ें[आँखों की गहराइयाँ ] [Soul Touching Hindi Poems on Eyes…..]

27. गुलों को चूम के जबसे चली हवाएं हैं

गुलों को चूम के जबसे चली हवाएं हैं
गयीं, जहां भी, वहां खुशनुमा फ़िज़ाएं हैं

भुला के गम को चलो आज मिल के रक्स करें
फलक पे झूम रहीं सांवली घटाएं हैं

सुबूत लाख करो पेश बेगुनाही का
शरीफ शख्स को मिलती सदा सजाएं हैं

तड़प हिरास (निराशा) घुटन बेकसी अकेलापन
अगर वो साथ है तो दूर ये बलाएँ हैं

रकीब हो, की हों कातिल, की कोई अपना हो
हमारे दिल में सभी के लिए दुआएं हैं

चला हुजूम सदा साथ झूठ के
लिखी नसीब में सच के सदा खलायें (अकेलापन) हैं

नीरज गोस्वामी

अश्कों की आवाज -[Ultimate Heartbreaking Sad Hindi Poems ]

28. झूम कर आयी घटा घनघोर है

झूम कर आयी घटा घनघोर है
डर रहा हूँ घर मेरा कमजोर है

मेघ छायें तो मगन हो नाचता
आज के इंसान से बेहतर मोर है

चल दिया करते हैं बुजदिल उस तरफ
रुख हवाओं का जिधर की ओर है

फासलों से क्यों डरें हम जब तलाक
दरमियान यादों की पुख्ता डोर है

जिंदगी में आप आये इस तरह
जैसे अमावस बाद आती भोर है

इस जहां में तुम अकेले ही नहीं
हर किसी के दिल में बसा एक चोर है

बात नजरों से होती है मियां
जो जबान से हो वो शोर है

नीरज गोस्वामी

29. दिल मिले दिल से फकत इतना जरूरी है मियां

दिल मिले दिल से फकत इतना जरूरी है मियां
क्यों मिलते फिर रहे हो प्यार में तुम राशियां

बारिशों का है तकाजा, सब तकल्लुफ छोड़कर
दें सदा बचपन को हम, फिर से करें अठखेलियां

घर तुम्हारा भी उड़ाकर साथ में ले जाएँगी
मत अदावत की चलाओ मुल्क में तुम आंधियां

किसलिए मगरूर इतने आप हैं, मत भूलिए
ख़ाक में इक दिन मिलेंगी आप जैसी हस्तियां

आ गए वो सैर को गुलशन में नंगे पाँव जब
झुक गयीं लेने को बोसा मोगरे की डालियाँ

खुशबुएँ लेकर हवाएं खुद-बा-खुद आ जाएँगी
खोलकर देखो तो घर की बंद साडी खिड़कियां

झाँक लें इक बार पहले अपने अंदर भी अगर
फिर नहीं आएं नजर, शायद किसी में खामियां

चाहते हैं सब, मिले फ़ौरन सिला यहां
डालता है कौन अब दरिया में करके नेकियां

नीरज गोस्वामी

30. तन्हाई में गाया कर

तन्हाई में गाया कर
खुद से भी बतियाया कर

हर राही उस से गुजरे
ऐसी राह बनाया कर

रिश्तों में गर्माहट ला
मुद्दे मत गरमाया कर

चाँद छुपे जब बदली में
तब छत पर आ जाया कर

जिन्दा गर रहना है तो
हर गम में मुस्काया कर

नाजायज जब बात लगे
तब आवाज उठाया कर

मीठी बातें याद रहें
कड़वी बात बुलाया कर

सुनकर सब झूमें
ऐसा गीत सुनाया कर

नीरज गोस्वामी

31. Hindi Love Poems-फासले मत बढ़ा इस कदर

फासले मत बढ़ा इस कदर
दूँ सदायें तो हों बेअसर

सोच मत, ठान ले, कर गुजर
ज़िन्दगी है बड़ी मुख़्तसर

बिन डरे सच कहें किस तरह
सीखिए आइनो से हुनर

गर सभी के रहें सुर अलग
टूटने से बचेगा न घर

राह मंजिल हुई उस घडी
तुम हुए जिस घडी हमसफ़र

घर जलाकर मेरा झूमते
दोस्तों की तरह ये शरर

हैं तो सभी पास
फिर किसे ढूंढ़ती है मेरी ये नजर

नीरज गोस्वामी

यह हिंदी कवितायेँ जरूर पढ़ें आपके दिल को छू जाएँगी !UNSEEN! [10 Proposal Poems for Her in Hindi]-सुकून हो तुम

32. संजीदगी, वाबस्तगी (सम्बन्ध), शाइस्तगी ( सभ्यता), खुद-आगाही (आत्मज्ञान)

संजीदगी, वाबस्तगी (सम्बन्ध), शाइस्तगी ( सभ्यता), खुद-आगाही (आत्मज्ञान)
आसूदगी (संतोष), इंसानियत, जिसमें नहीं क्या आदमी

ये खीरगी (चमक), ये दिलबरी, ये कमसिनी, ये नाजुकी
दो चार दिन का खेल है, सब कुछ यहां पर अरीजी (क्षणिक)

हैवानियत हमको कभी मजहब ने सिखलाई नहीं
हमको लड़ता कौन है? ये सोचना है लाजमी

हर बार जब दस्तक हुई उठकर गया,कोई न था
तुझको कसम, मत कर हवा, आशिक से ऐसी दिल्लगी

हो तम घना अवसाद का तब कर दुआ उम्मीद की
जलते रहें दीपक सदा कायम रहे ये रौशनी

पहरे जुबान पर लगें, हों सोच पर जब बंदिशें
जम्हूरियत की बात तब लगती है कितनी खोखली

फ़ाक़ाज़दा इंसान को तुम ले चले दैरो-हरम
पर सोचिये कर पायेगा वहां वो बंदगी

नीरज गोस्वामी

33. दोस्त सब जान से भी प्यारे हैं

दोस्त सब जान से भी प्यारे हैं
जब तलाक दूर वो हमारे हैं

जो भी चाहूँ वहीँ से मिलता है
माँ के हाथों में वो पिटारे हैं

मुस्कुराते हैं हम तो पी के इन्हे
आप कहते हैं अश्क खारे हैं

जीत का मोल पूछिए उनसे
बाजियां जो हमेशा हारे हैं

बाजुओं पर यकीन है जिनको
दूर उनसे कहाँ किनारे हैं

जिनमें शामिल नहीं हो तुम हमदम
वो नज़ारे भी क्या नज़ारे हैं

जिंदगी नाम उन पलों का है
तेरे सिमरन में जो गुजरे हैं

दिन अकेले ही काट लो
रात में चाँद है सितारे हैं

नीरज गोस्वामी

34. चाहते हैं लौ लगाना आप गर भगवान् से

चाहते हैं लौ लगाना आप गर भगवान् से
प्यार करना सीखिए पहले हर इक इंसान से

खार के बदले में यारो खार देना सीख लो
गुल दिया करते हैं जो, वो लोग हैं नादाँ-से

आजकल हैं लोग ऐसे क्यों जरा बतलाइये
साँस तो लेते हैं पर लगते हैं बस बेजान-से

एक दिन तनहा वही पछतायेंगे तुम देखना
तोलते रिश्तों को जो हैं फायदे नुकसान से

आप बेहतर हैं की मेरे काम ही आएं नहीं
गर दबाना चाहते हैं बाद में एहसान से

बढ़ के कोई पाँव छूता है बुजुर्गों के अगर
लोग रह जाते हैं उसको देख कर हैरान – से

ढूंढ़ते ही रहे हल हम उन सवालों का सदा
जो हमें लगते रहे हरदम बड़े आसान-से

खेलने के गुर सीखना तब तलक आसान है
जब तलक हो दूर खेल के मैदान से

नीरज गोस्वामी

खामोशियों की आवाज- UNIQUE Good Night Hindi Love Poems

35. नया गीत हो, नया साज हो, नया जोश और उमंग हो

नया गीत हो, नया साज हो, नया जोश और उमंग हो
नए साल में नए गुल खिलें, नयी हो महक नया रंग हो

हैं जो मस्त अपने ही हाल में, कोई फिक्र कल की न हो जिसे
उसे रास आती है ज़िन्दगी, जो कबीर जैसा मलंग हो

वही रंजिशें, वही दुश्मनी, मिला क्या हमें बता जीत से
तेरी हार में मेरी हार है, यही सोच लें तो न जंग हो

करें जो सभी वही हम करें, तो है बेसबब-सी ये जिंदगी
है मजा अगर करें कुछ नया, जिसे देख ये जहां दंग हो

तुझे देखकर मुझे यूँ लगा, कोई संदली-सी है शाख तू
जो न रह सके तुझे छोड़कर, मेरा दिल ये जैसे भुजंग हो

हो न लिजलिजा बिना रीढ़ का, है यही दुआ ऐ मेरे खुदा
दे वतन को ऐसा तू रहनुमा, जो दिलेर और दबंग हो

नीरज गोस्वामी

36. देश के हालात बदतर हैं, सभी ने ये कहा

देश के हालात बदतर हैं, सभी ने ये कहा
पर नहीं बतला सका कोई भी अपनी भूमिका

झूठ, मक्कारी, फरेबी, हरकतें अखबार में
रोज पढ़ते सुबह हैं, पर शाम को देते भुला

बस गया शहरों में इंसान, फर्क लेकिन क्या पड़ा
आदतें अब भी हैं वैसी, जब बसेरा थी गुफा

इस कदर धीमा हमारे मुल्क का कानून है
फैसला आने तलाक, मुजरिम की भूलें हम खता

छोड़िये फितरत समझना दूसरे इंसान की
खुद हमें अपनी समझ आती कहाँ है, सच बता

दौड़ता तितली के पीछे अब कोई बच्चा नहीं
लुत्फ़ बचपन का सारा वो होड़ में खो दिया

दूसरों के दुःख से जो बशर अनजान है
उसको अपना दुःख हमेशा ही लगा सबसे बड़ा

नीरज गोस्वामी

37. जीएं खुद के लिए गर हम मजा तब क्या है जीने में

जीएं खुद के लिए गर हम मजा तब क्या है जीने में
बहे औरों की खातिर जो, है खुशबू उस पसीने में

है जिनके बाजुओं में दम, वो दरिया पार कर लेंगे
बहोत मुमकिन है डूबें वो, जो बैठे हैं सफ़ीने (नाव) में

ये कैसा दौर आया है, सरों पर ताज है उनके
नहीं मालूम जिनको फर्क, पत्थर और नगीने में

हमारे दोस्तों की मुस्कराहट इक छलावा है
है पाया जहर अक्सर खूबसूरत आबगीने (रंगीन कांच की शीशियां) में

सितम सहने की आदत, इस कदर हमको पड़ी
कहीं कुछ हो, नहीं अब खौलता है खून सीने में

नीरज गोस्वामी

38. कौन कहता है छुप के होता है

कौन कहता है छुप के होता है
क़त्ल अब दिन दहाड़े होता है

गर पता है तुम्हें तो बतलाओ
इश्क़ कब क्यों किसी से होता है

ढूंढ़ते हो सदा वहां उसको
जो हमेशा यहां पे होता है

धड़कनें घुंघरुओं-सी बजती हैं
दिल जब उसके हवाले होता है

आरजू क्यों करें सहारे की
आसमा की सहारे होता है

चीख कर क्यों सदायें देते हो
जब असर बिन पुकारे होता है

उम्र ढलने लगी समझ
दर्द अब बिन बहाने होता है

नीरज गोस्वामी

39. फिर परिंदा चला उड़ान पे है

फिर परिंदा चला उड़ान पे है
तीर हर शख्स की कमान पे है

फसल की अब खुदा ही खैर करे
पासबाँ आजकल मचान पे है

तब बदलना नहीं गलत उसको
जब लगे रहनुमा थकान पे है

है निगाहें बुलंदियों पे मेरी
क्या हुआ पाँव गर ढलान पे हैं

धार शमशीर पर करो अपनी
जुल्म का दौर फिर उठान पे है

शहर के घर में यूँ तो है सब-कुछ
पर सुकून तो, गाँव के मकान पे है

बात तेरी सुनेंगे सभी
जब तक चाशनी जबान पे है

नीरज गोस्वामी

40. Heart Touching Poems on Life in Hindi-गुलों को, तितलियों को किस तरह करेगा याद वो

गुलों को, तितलियों को किस तरह करेगा याद वो
की जिसकों फिक्र रात-दिन लगी हो रोजगार की

बिगड़ के जिसने पा लिया तमान लुत्फे जिंदगी
नहीं सुनेगा फिर वो बात कोई भी सुधार की

वो खुश रहे ये सोचकर सदा मैं हारता गया
किसी के साथ जब लड़ी लड़ाई आरपार की

जिसे भी देखिये इसे वो तोड़कर ही है बढ़ा
कहाँ रहीं हैं देश में जरूरतें कतार की

तुझे पढ़ा हमेशा मैंने अपनी बंद आँखों से
ये दास्ताँ है नजर पे रौशनी के वार की

चढ़े जो इस कदर की फिर कभी उतर नहीं सके
तलाश जिंदगी में है मुझे उसी
खुमार की

नीरज गोस्वामी

41. नहीं है अरे ये बगावत नहीं है

नहीं है अरे ये बगावत नहीं है
हमें सर झुकाने की आदत नहीं है

छुपाये हुए हैं वही लोग खंजर
जो कहते किसी से अदावत नहीं है

करूँ क्या पैरों का अगर इनसे मुझको
फलक नापने की इजाजत नहीं है

उठाकर गिराना गिराकर मिटाना
हमारे यहाँ की रवायत नहीं है

मिलाकर निगाहें झुकाते जो गर्दन
वही कह रहे हैं मुहब्बत नहीं है

बहोत कर लीं पहले जमाने से हमने
हमें अब किसी से शिकायत नहीं है

करोगे घटाओं का क्या यार
अगर भीग जाने की चाहत नहीं है

नीरज गोस्वामी

42. सीधी बातें, सच्ची बातें

सीधी बातें, सच्ची बातें
भूले सारे अच्छी बातें

ठन्डे मन से गर कर लो तो
हो जाती सब नक्की बातें

जीवन में लज्जत ले आतीं
मीठी, तीखी, खट्टी बातें

पीड़ा बढ़ जाती है उसकी
दिल में जिसने रखी बातें

मत ले लेना दिल पर अपने
उसकी पक्की-कच्ची बातें

हासिल क्या होता है करके
बेमतलब की रद्दी बातें

सिखलाती है जीवन जीना
माँ की लोरी,पप्पी बातें

उलझें तो कब सुलझें
ज्यों धागे की लच्छी बातें

नीरज गोस्वामी

43. हर अदा में तेरी दिलकशी है प्रिये

हर अदा में तेरी दिलकशी है प्रिये
जानलेवा मगर सादगी है प्रिये

भोर की लालिमा चाँद की चांदनी
सामने तेरे फीकी लगी है प्रिये

लू-भरी हो भले या भले सर्द हो
साथ तेरे हवा फागुनी है प्रिये

बिन तेरे बैठ ऑफिस में सोचा किया
ये सजा-सी भी क्या नौकरी है प्रिये

मुस्कुराती हो जब देखकर प्यार से
एक सिहरन-सी तब दौड़ती है प्रिये

तेरी आदत-सी अब तो मुझे पड़ गयी
और आदत कहाँ छूटती है प्रिये

मन-सरोवर में खुशियों के खिले
पास आहट तेरी आ रही है प्रिये

नीरज गोस्वामी

44. बाद मुद्दत के वो मिला है मुझे

बाद मुद्दत के वो मिला है मुझे
डर जुदाई का फिर लगा है मुझे

आ गया हूँ मैं दस्तरस में तेरी
अपने अंजाम का पता है मुझे

क्या करूँ ये कभी नहीं कहता
जो करूँ उसपे टोकता है मुझे

तुझसे मिलकर मैं जब से आया हूँ
हर कोई मुड़ के देखता है मुझे

ठोकरें जब कभी मैं खाता हूँ
कौन है वो जो थामता है मुझे

सोचता हूँ ये सोचकर मैं उसे
वो भी ऐसे ही सोचता है मुझे

मैं तुझे किस तरह बयान करूँ
ये करिश्मा तो सीखना है मुझे

नींद में चल रहा था मैं
तूने आकर जगा दिया है मुझे

नीरज गोस्वामी

45. गर जवानी में तू थकेला है

गर जवानी में तू थकेला है
साँस लेकर भी तू मरेला है

सच-बयानी की ठान ली जबसे
हाल तबसे ही ये फटेला है

ताजगी मन में आ न पायेगी
गर विचारों में तू सड़ेला है

हो जरूरत तो ठीक है प्यारे
बेजुरत तू क्यों खटैला है

रात गम की हो बेअसर काली
चाँद आशा का गर उगेला है

लोग सीढ़ी हैं, काम में लेलो
पाठ बचपन से ये रटेला है

दिल भिखारी से कम नहीं उसका
ताज जिसके भी सर सजेला है

रोक पाओगे तुम नहीं
वो गिरेगा जो फल पकेला है

नीरज गोस्वामी

बे-मतलब इंसान भिड़ू
होता है हलकान (अधमरा) भिड़ू

अक्खा लाइफ मच मच में
काटे वो, नादाँ भिड़ू

प्यार अगर लफड़ा है तो
ये लफड़ा वरदान भिड़ू

कैसे हम बिंदास रहें
गम लाखों इक जान भिड़ू

बात अपुन की सिंपल है
दे,फिर ले सम्मान भिड़ू

जब जी चाहे टपका दे
रब तो है इक डॉन भिड़ू

फुल टू मस्ती में गा रे
तू जीवन का गान भिड़ू

सब झगडे खल्लास करे
छोटी सी मुस्कान भिड़ू

जीवन है सूखी रोटी
तू ‘मस्का-बन’ मान भिड़ू

‘खोखा’ ‘पेटी’ ले डूबी
हम सबका ईमान भिड़ू

उसकी वाट लगा
जो दिखलाये शान भिड़ू

नीरज गोस्वामी

46. Romantic Love Poems in Hindi- जब उठीं वो पलकें तो धुप-सी खिली जैसे

जब उठीं वो पलकें तो धुप-सी खिली जैसे
बाह रही हैं आँखों से नूर की नदी जैसे

श्याम को बुलाती है लोकलाज ताज राधा
फागुनी बयारों से बावरी हुई जैसे

गीत वो सुनाती है, तोतली जुबान में यूँ
हौले-हौले बजती हो, बांसुरी कोई जैसे

वस्ल में बदन महके इस तरह तेरा जानम
मोगरे के फूलों से डाल हो लड़ी जैसे

है नहीं मुकम्मल कुछ इस शहर में अब
आपके बिना सबमें आपकी कमी जैसे

रौशनी का झरना-सा, फूटता है झर-झर-झर
मोतियों की बारिश है, आपकी हंसी जैसे

दुश्मनों पे डालो तुम, रंग प्रेम के
यूँ मिलो की बरसों की, हो ये दोस्ती जैसे

नीरज गोस्वामी

47. हुआ जो सोच में बूढा उसे फागुन सताता है

हुआ जो सोच में बूढा उसे फागुन सताता है
मगर जो है जवान दिल वो सदा होली मनाता है

अपुन तो टुन्न हो जाते भिड़ू जब हाथ से अपने
हमें घर वो बुला कर प्यार से पानी पिलाता है

उसे बाजार के रंगों से रंगने की जरूरत क्या
फकत छूते ही मेरे जो गुलाबी होता जाता है

सियासत मुल्क में शायद है इक कंगाल की बेटी
हर इक बूढ़ा उसे पाने को कैसे छटपटाता है

बदल दूंगा मैं इसका रंग कह कर देखिये नेता
बुरे हालात सी हर भैंस पर उबटन लगता है

बहुत मटका रही हो आज पतली जिस कमरिया को
उसे ही याद रख इक दिन खुदा कमरा बनाता है

दबा लेते हैं दिल में चाह अब तुझसे लिपटने की
करें कितनी भी कोशिश बीच में ये पेट आता है

सुनाई ही नहीं देगा किसी को सच वहां
तू क्यों नक्कार खाने में खड़ा तूती बजाता है

नीरज गोस्वामी

48. केसरिया, लाल, पीला, नीला, हरा, गुलाबी

केसरिया, लाल, पीला, नीला, हरा, गुलाबी
सारे लगा के देखे, तुझपे खिला गुलाबी

रहता था लाल हरदम, दुश्मन के खून से जो
होली में प्यार से वो, खंजर हुआ गुलाबी

काला कलूट ऐसा छिप जाये रात में जो
फागुन में सुन सखी वो, लगता पिया गुलाबी

आँखों में लाल डोरे, पैरों में हलकी थिरकन
तू पास हो तो मुझ पर, चढ़ता नशा गुलाबी

पैगाम पी के आया, होली पे आ रहे हैं
मन का मयूर नचा, तन हो गया गुलाबी

कल तक सफ़ेद थी, जुम्मन चाचा की दाढ़ी
काला किया लगा तब, है मामला गुलाबी

होली पे मिल के इक दूसरे को कर दें
केसरिया, लाल, पीला, नीला, हरा, गुलाबी

नीरज गोस्वामी

49. आँखों में तेरी अपने, कुछ ख्वाब सजा दूँ तो?

आँखों में तेरी अपने, कुछ ख्वाब सजा दूँ तो?
फिर ख्वाब वही सारे, सच कर के दिखा दूँ तो?

महकेगी गुलाबों सी, होली पे मेरी जानम
इक रंग मुहब्बत का, थोड़ा सा लगा दूँ तो?

जिस राह से गुजरो तुम, सब फुल बिछाते हैं
उस राह पे मैं अपनी, पलकें ही बिछा दूँ तो?

कहते हैं वो बारिश में, बा-होश नहाएंगे
बादल में अगर मदिरा, चुपके से मिला दूँ तो?

फागुन की बयारों में, कुचियाते हुए महुए
की छाँव तुझे दिल की, हर बात बता दूँ तो?

ये उसकी मुंडेरों से, आगे नहीं जायेंगे
चाहत के परिंदो को, मैं खुद ही उड़ा दूँ तो?

हो जायेगा टेसू के, फूलों सा तेरा चेहरा
उस पहली छुअन की मैं, गर याद दिला दूँ तो?

उफ़! है हैट जाओ, कहते हुए लिपटेंगी
मैं हाथ पकड़ उसका हौले से दबा दूँ तो?

नीरज गोस्वामी

50. पिलाई भांग होली में, वो प्याले याद आते हैं

पिलाई भांग होली में, वो प्याले याद आते हैं
गटर वो, पी कर हम गिरे जिनमें, बहोत याद आते है

दुलत्ती मरते देखूं, गधों को जब ख़ुशी से मैं
निकम्मे सब मेरे कम्बख्त, साले याद आते हैं

गले लगती हो जब खाकर, कभी आचार लहसुन का
तुम्हारे शहर के गंदे, वो नाले याद आते हैं

भगा लिया तेरे घर से, बनाने को तुझे बीवी
पड़े थे अक्ल पर मेरी, वो ताले याद आते हैं

नमूने देखता हूँ जब अजायबघर में तो यारों
न जाने क्यों मुझे ससुराल वाले याद आते हैं

कभी तो पेंट फाड़ी और कभी सड़कों पे दौड़ाया
तेरी अम्मी ने जो कुत्ते थे पाले, याद आते हैं

सफेदी देख जब गोरी कहे अंकल मुझे
जवानी के दिनों के बाल काले याद आते हैं

नीरज गोस्वामी

51. करें जब पांव खुद नर्तन, समझ लेना की होली है

करें जब पांव खुद नर्तन, समझ लेना की होली है
हिलोरें ले रहा हो मन, समझ लेना की होली है

कभी खोलो अचानक, आप अपने घर का दरवांजा
खड़े देहरी पे हो साजन, समझ लेना की होली है

तरसती हो जिसके हों दीदार तक को आपकी आँखें
उसे छूने को आये क्षण, समझ लेना की होली है

बुलाये जब तुझे वो गीत गए कर ताल पर ढफ की
जिसे मन किये दुश्मन, समझ लेना की होली है

किसी की याद से बजने लगें जब आपके दिल में
कभी घुंघरू कभी कंगन, समझ लेना की होली है

अगर महसूस हो तुमको, कभी जब सांस लो
हवाओं में घुला चन्दन, समझ लेना की होली है

नीरज गोस्वामी

दोस्तों ऊपर लिखी हर कविता अपने आप में बहोत ही लाजवाब है और हम उम्मीद करते हैं की आपको भी बहोत पसंद आयी होंगी सारी कवितायेँ और आपके दिल को भी यह कवितायेँ जरूर छू गयी होंगी। अगर सच में हमारी आज की Heart Touching Hindi Poems आपको पसंद आयी तो comment करके हमें जरूर बताइये और ज्यादा से ज्यादा like और share कीजिये।

यदि आप भी कविता या शायरी लिखते हैं तो हमें भेज सकते हैं हम आपकी रचना को अपनी वेबसाइट पर आपके नाम के साथ उचित स्थान देंगे आप अपनी रचना हमें नीचे दी गयी ईमेल आईडी पर भेज सकते हैं आपकी रचना शामे दे हम पोस्ट करेंगे और आपको नोटिफिकेशन भेज देंगे धन्यवाद

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