rahat indori shayari in hindi

Rahat Indori Shayari in Hindi

Rahat Indori Shayari in Hindi– दोस्तों राहर इन्दोरी साहब को कौन नहीं जानता और उनकी शायरियां, कवितायेँ, ग़ज़लें बहोत ही जबरदस्त और गहरी होती हैं और उनका शेर पढ़ने का जो अंदाज़ है उसका तो कोई मुकाबला ही नहीं। आज हम आप सबके लिए राहत इन्दोरी साहब की कुछ बेहतरीन शायरी संग्रह लेकर आये हैं जिन्हे पढ़कर आप अंदर तक हिल जायेंगे।
दोस्तों बहोत ही दिलचस्प और मन को भा जाने वाली यह शायरियां आपको बहोत पसंद आएँगी यदि पसंद आएं तो हमें कमेंट करके जरूर बताएं और आगे भी शेयर करें। तो चलिए आज की महफ़िल की शुरुआत करते हैं

Rahat Indori Shayari in Hindi
Rahat Indori Shayari in Hindi

Rahat Indori Shayari in Hindi

सबकी पगड़ी को हवाओं में उछाला जाये
सबकी पगड़ी को हवाओं में उछाला जाये

सोचता हूँ की कोई अख़बार निकाला जाये

पीके जो मस्त हैं उनसे तो कोई खौफ नहीं
पीके जो मस्त हैं उनसे तो कोई खौफ नहीं
पीके जो होश में हैं उनको संभाला जाये

आसमा ही नहीं एक चाँद भी रहता है यहां
आसमा ही नहीं एक चाँद भी रहता है यहां
भूलकर भी कभी पत्थर न उछाला जाये

अपनी पहचान मिटाने को कहा जाता है
अपनी पहचान मिटाने को कहा जाता है
बस्तियां छोड़कर जाने को कहा जाता है

उसको हर एक रोग का नुस्खा जुबानी याद है
उसको हर एक रोग का नुस्खा जुबानी याद है
मेरे मुँह से जख्म निकला उसने नाख़ून कह दिया

घुल गए होंठो पे सबके खट्टे मीठे जायके
घुल गए होंठो पे सबके खट्टे मीठे जायके
मैंने उसकी सांवली रंगत को जामुन कह दिया

अपने हाकिम की फकीरी पे तरस आता है
अपने हाकिम की फकीरी पे तरस आता है
जो गरीबों से पसीने की कमाई मांगें

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खड़े हैं मुझको खरीददार देखने के लिए
खड़े हैं मुझको खरीददार देखने के लिए
मैं घर से निकला था बाज़ार देखने के लिए

हज़ारों बार हज़ारों की शक्ल देखते हैं
हज़ारों बार हज़ारों की शक्ल देखते हैं
तरस गए तुझे एक बार देखने के लिए

अभी गनीमत है सब्र मेरा
अभी गनीमत है सब्र मेरा
अभी लबालब भरा नहीं हूँ
वो मुझको मुर्दा समझ रहा है
उसे कहो मैं मरा नहीं हूँ

वो कह रहा है की कुछ दिनों में मिटा के रख दूंगा नस्ल तेरी
है उसकी फितरत डरा रहा है
है मेरी आदत डरा नहीं हूँ
यकीं किया तो ये जाना, यकीं में क्या क्या है
ये आसमान से पूछो जमीन में क्या क्या है
तुम्हारे हाथ का गुलदस्ता तो आ रहा है नजर
मगर पता तो चले आस्तीन में क्या क्या है

फूल बेचारे परेशां है की महकेंगे कहाँ
तितलियों के लब-ऐ इज़हार पे पाबंदी है
क़त्ल करने की खुली छूट है दुनिया में
मगर प्यार मत करना यहां प्यार पे पाबन्दी है

कौन ज़ालिम है यहां, जुल्म हुआ है किस पर?
कौन ज़ालिम है यहां, जुल्म हुआ है किस पर?
क्या खबर आएगी अखबार को तय करना है

सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में
किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है

बनके एक हादसा बाज़ार में आ जायेगा
बनके एक हादसा बाज़ार में आ जायेगा
जो नहीं होगा वो अखबार में आ जायेगा
चोर उचक्कों की करो क़द्र
के मालूम नहीं कौन कब कौनसी सरकार में आ जायेगा
नयी दुकानों के चक्कर से निकल जा
वरना घर का सामान भी बाज़ार में आ जायेगा

किसने दस्तक दी, ये दिल पर, कौन है?
किसने दस्तक दी, ये दिल पर, कौन है?
आप तो अंदर हैं, बाहर कौन है?

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शहरों में तो बारूदों का मौसम है
शहरों में तो बारूदों का मौसम है
गाँव चलो ये अमरूदों का मौसम है

राज जो कुछ हो इशारों में बता भी देना
राज जो कुछ हो इशारों में बता भी देना
हाथ जब उससे मिलाना तो दबा भी देना
वैसे इस खत में कोई बात नहीं है
वैसे एहतियातन इसे पढ़ लो तो जला भी देना

मेरी सांसों में समाया भी बहोत लगता है
और वही शख्स पराया भी बहोत लगता है
और उससे मिलने की तमन्ना भी बहोत है
लेकिन आने जाने में किराया भी बहोत है

फैसला जो कुछ भी हो मंजूर होना चाहिए
फैसला जो कुछ भी हो मंजूर होना चाहिए
जंग हो या इश्क़ हो भरपूर होना चाहिए
कट चुकी है उम्र सारी जिनकी पत्थर तोड़ते
अब तो इन हाथों में कोहिनूर होना चाहिए

हम अपनी जान के दुश्मन को, अपनी जान कहते हैं
हम अपनी जान के दुश्मन को, अपनी जान कहते हैं
मुहब्बत की इसी मिटटी को हिंदुस्तान कहते हैं
जो ये दीवार का सुराख है, साजिश का हिस्सा है
मगर हम इसको अपने घर का रोशनदान कहते हैं
जो दुनिया को सुनाई दे उसे कहते हैं ख़ामोशी
जो आँखों में दिखाई दे उसे तूफ़ान कहते हैं
मेरे अंदर से एक-एक करके सब कुछ हो गया रुखसत
मगर एक चीज बाकी है जिसे ईमान कहते है

सिर्फ खंजर ही नहीं आँखों में पानी चाहिए
सिर्फ खंजर ही नहीं आँखों में पानी चाहिए
ए खुदा दुश्मन भी मुझको खानदानी चाहिए
मैंने अपनी खुश्क आँखों से लहू छलका दिया
एक समंदर कह रहा था मुझको पानी चाहिए
सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहे
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहे
शाखों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम
आंधी से कोई कहदे की औकात में रहे

जो तौर है दुनिया का उसी तौर से बोलो
जो तौर है दुनिया का उसी तौर से बोलो
बहरों का इलाका है, जरा जोर से बोलो
दिल्ली में हम ही बोला करें अम्र की बोली
यारों तुम भी कभी लाहौर से बोलो
सबको रुस्वा बारी बारी किया करो
सबको रुस्वा बारी बारी किया करो
हर मौसम में फतवे जारी किया करो

रोज वही एक कोशिश जिन्दा रहने की
मरने की भी तैयारी किआ करो
चाँद ज्यादा रोशन है तो रहने दो
जुगनू भैया जी मत भारी किया करो

अँधेरे चारों तरफ सांय सांय करने लगे
अँधेरे चारों तरफ सांय सांय करने लगे
चराग हाथ उठा कर दुआएं करने लगे
सलीका जिनको सिखाया था हमने चलने का
वो लोग आज हमें दांय बांय करने लगे
तरक्की कर गए बीमारों के सौदागर
ये सब मरीज हैं जो अब दवाएं करने लगे
अजीब रंग था मजलिस का खूब महफ़िल थी
शरीफ लोग उठे कांय कांय करने लगे

कभी अकेले में मिलकर झंजोड़ दूंगा उसे
कभी अकेले में मिलकर झंजोड़ दूंगा उसे
जहाँ जहाँ से वो टूटा है जोड़ दूंगा उसे
और मुझे वो छोड़ गया कमाल है उसका
इरादा मैंने किया था की छोड़ दूंगा उसे
पसीने बांटता फिरता है हर तरफ सूरज
कभी जो हाथ लगा तो निचोड़ दूंगा उसे
मजा चखा के ही माना हूँ मैं भी दुनिया को
समझ रही थी की ऐसे ही छोड़ दूंगा उसे

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कश्ती तेरा नसीब चमकदार कर दिया
कश्ती तेरा नसीब चमकदार कर दिया
इस पार के थपेड़ों ने उस पार कर दिया
अफवाह थी की मेरी तबियत खराब है
लोगों ने पूछ पूछ के बीमार कर दिया

दो गज सही मगर ये मेरी मिलकियत है
दो गज सही मगर ये मेरी मिलकियत है
ऐ मौत तूने मुझको जमींदार कर दिया
मेरे हुजरे में नहीं, मेरे हुजरे में नहीं
और कहीं पर रख दो
आसमान लाये हो? ले आओ
ज़मीन पर रख दो
अब कहाँ ढूंढ़ने जाओगे हमारे कातिल
आप तो क़त्ल का इलज़ाम हम ही पर रख दो

मैंने जिस ताक पे कुछ टूटे दिए रखे हैं
मैंने जिस ताक पे कुछ टूटे दिए रखे हैं
चाँद तारों को भी ले जाके वही पर रख दो

तेरी हर बात मुहब्बत में गवारा करके
दिल के बाज़ार में बैठे हैं ख़सारा करके
आसमानों की तरफ फेंक दिया हैं मैंने
आसमानों की तरफ फेंक दिया हैं मैंने
चाँद मिटटी के चरागों को सितारा करके
आते जाते हैं कई रंग मेरे चेहरे पर
लोग लेते हैं मजा जिक्र तुम्हरा करके
मैं वो दरिया हूँ, मैं वो दरिया हूँ, मैं वो दरिया हूँ
की हर बूँद भंवर है जिसकी
तुमने अच्छा ही किआ मुझसे किनारा करके
मुन्तज़िर हूँ, की सितारों की जरा आँख लगे
चाँद को छत पे बुला लूंगा इशारा करके

आज हम दोनों को फुर्सत है
आज हम दोनों को फुर्सत है
चलो इश्क़ करें
इश्क़ दोनों की जरूरत है, चलो इश्क़ करें
इसमें नुक्सान का खतरा ही नहीं रहता है
ये मुनाफे की तिजारत है, चलो इश्क़ करें
आप हिन्दू, मैं मुसलमान, ये ईसाई, वो सिख
यार छोडो ये सियासत है, चलो इश्क़ करें

उसकी कथई आँखों में हैं जंतर मंतर सब
उसकी कथई आँखों में हैं जंतर मंतर सब
चाकू-वाकु, छुरियां-वुरियां सब
जिस दिन से तुम रूठी
मुझसे रूठे रूठे हैं
चादर-वादर तकिया-वाकिया, बिस्तर-विस्तर सब
मुझसे बिछड़कर वो भी कहाँ पहले जैसी है
फीके पड़ गए कपडे-वपड़े, जेवर-बेवर सब

बुलाती है मगर जाने का नहीं
बुलाती है मगर जाने का नहीं
ये दुनिया है, इधर जाने का नहीं
जमी भी सर पे रखनी हो तो रखो
चले हो अगर तो ठहर जाने का नहीं

अपना आवारा सर झुकाने को तेरी दहलीज़ देख लेता हूँ
और फिर कुछ दिखाई दे की न दे काम की चीज देख लेता हूँ
तेरी परछाई मेरे घर से नहीं जाती है, तेरी परछाई मेरे घर से नहीं जाती है
तू कहीं भी हो मेरे अंदर से नहीं जाती है
एक मुलाक़ात का जादू की उतरता ही नहीं
तेरी खुशबू मेरी चादर से नहीं जाती है

जिहालतों (अज्ञान) के अँधेरे मिटा के लौट आया
जिहालतों (अज्ञान) के अँधेरे मिटा के लौट आया
मैं आज सारी किताबें जलाके लौट आया
और वो अब भी रेल में बैठी सिसक रही होगी
मैं अपना हाथ हवा में हिलाके लौट आया
खबर मिली है सोना निकल रहा है वहां
मैं जिस जमीन पे ठोकर लगा के लौट आया

सड़क पर जनाजे ही जनाजे हैं
अभी माहौल मर जाने का नहीं
है दुनिया छोड़ना मंजूर लेकिन
है दुनिया छोड़ना मंजूर लेकिन
वतन को छोड़ कर जाने का नहीं
मेरे बेटे किसी से इश्क़ कर
मगर हद से गुजर जाने का नहीं

मैं जब मर जाऊं तो मेरी अलग पहचान लिख देना
मैं जब मर जाऊं तो मेरी अलग पहचान लिख देना
लहू से मेरी पेशानी पे हिन्दुस्तान लिख देना

फूलों की दुकाने खोलो, खुशबू का व्यापार करो
इश्क़ खता है, तो ये खता एक बार नहीं, सौ बार करो

उँगलियाँ यूँ न सब पर उठाया करो, खर्च करने से पहले कमाया करो
ज़िन्दगी क्या है खुद ही समझ जाओगे, कभी बारिशों में पतंग उड़ाया करो

हाथ खाली हैं तेरे शहर से जाते जाते, जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते
अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है
उम्र गुजरी है तेरे शहर में आते जाते

क्या खरीदोगे या बाज़ार बहोत महंगा है
प्यार की ज़िद न करो प्यार बहोत महंगा है

मैं आखिर कौनसा मौसम तुम्हारे नाम कर देता
यहां हर मौसम को गुजर जाने की जल्दी थी

आँखों में पानी रखो, होंठों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहोत सारी रखो

यूँ तो हर फूल पे लिखा है की तोड़ो मत
दिल मचलता है तो कहता है छोडो मत

अब हम मकान में ताला लगाने वाले हैं
पता चला है की मेहमान आने वाले हैं

शाखों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम
आँधियों से जरा कह दो औकात में रहे

हमसे पहले भी मुसाफिर कई गुजरे होंगे
कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते

तूफानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो
मल्लाहों का चक्कर छोडो, तैर के दरिया पार करो

घर के बाहर ढूंढ़ता रहता हूँ दुनिया
घर के अंदर दुनिया-दारी रहती है

लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभालते क्यों हैं
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं

शाम तक लौट आऊंगा, हाथों का खाली-पन लिए
आज फिर निकला हूँ मैं घर से हथेली चूम कर

बहोत गुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ

मेरे अधूरे शेर में थी कुछ कमी मगर
तुम मुस्कुरा दिए तो मुझे दाद मिल गयी

लम्हा लम्हा मुझे जंगल का सफर लगता है
खो न जाऊं भीड़ में कहीं मुझे डर लगता है
साथ ये भी न कहीं छोड़ दे दुनिया की तरह
अपनी तन्हाई से अक्सर मुझे डर लगता है

जो मेरा दोस्त भी है, मेरा हमनवा भी है
वो शख्स सिर्फ भला ही नहीं बुरा भी है

दरमियान एक ज़माना रखा जाये, तब कोई पल सुहाना रखा जाये
सर पे सूरज सवार रहता है, पीठ पर शामियाना रखा जाये

अजीब सी आदत है और गज़ब की फितरत है मेरी
मुहब्बत हो
या नफरत हो बहोत शिद्दत से करता हूँ

जुगनुओं को साथ लेकर, रात रोशन कीजिये
रास्ता सूरज का देखा तो सुबह हो जाएगी

बदल जाओ वक़्त के साथ, या वक़्त बदलना सीखो
मजबूरियों को मत कोसो हर हाल में चलना सीखो

दोस्ती जब किसी से की जाए
दोस्तों की भी राय ली जाये

पता नहीं सुधर गया है या बिगड़ गया है
ये दिल अब किसी से मुहब्बत नहीं करता

(Rahat Indori Shayari in Hindi)

दोस्तों राहत इन्दोरी साहब की शायरियां सिर्फ दिल तक नहीं रहती, सीधा रूह में उतर जाती हैं उम्मीद करते हैं आपको बहोत अच्छी लगी होंगी और राहत इन्दोरी साहब तो वो शख्स हैं जिनका कोई जवाब नहीं वो लाजवाब हैं। (Rahat Indori Shayari in Hindi)
दोस्तों अगर आप लोग भी शायरी या कवितायेँ लिखते हैं तो हमें नीचे दी गयी ईमेल आईडी पर भेज सकते हैं हम आपकी रचना को अपनी वेबसाइट पर आपके नाम के साथ उचित स्थान जरूर देंगे

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One Comment

Bharat Verma
July 24, 2020 at 4:13 pm24

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